
उत्तर बस्तर कांकेर 05 नवम्बर 2026 : दीपावली के अवसर पर जब हर घर रोशनी से जगमगाने की तैयारी में है, तब जिले के चारामा विकासखंड के ग्राम भिलाई की महिलाएं अपने हाथों से तैयार प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल गोबर के दीयों से न केवल घरों को रोशन कर रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह भी प्रकाशित कर रही हैं।
चारामा विकासखण्ड के ग्राम भिलाई के सरगम उत्पादक समूह, बिहान से जुड़कर स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। वर्ष 2016 में महज 10 महिलाओं से शुरू हुआ यह समूह आज 36 महिलाओं को आजीविका से जोड़ चुका है।
गोबर से तैयार होते हैं सुंदर और प्राकृतिक दीपक
समूह की महिलाएं गोबर से दीये तैयार करने की पूरी प्रक्रिया स्वयं करती हैं। गोबर को एकत्रित कर उसे अच्छी तरह तैयार किया जाता है और आवश्यक सामग्री के साथ मिश्रण बनाकर सांचों की सहायता से विभिन्न आकार के दीये तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें सुखाया जाता है और बिक्री के लिए तैयार किया जाता है। प्राकृतिक सामग्री से बने ये दीये पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और स्थानीय हुनर की पहचान भी है।
समूह की सदस्य श्रीमती सुभद्रा नागराज बताती हैं कि वर्ष 2022 में उन्हें गोबर के दीये बनाने की प्रेरणा मिली। पहले वर्ष महिलाओं ने करीब 10 हजार दीये तैयार किए, जिससे उन्हें लगभग 20 हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। इस सफलता ने महिलाओं का उत्साह बढ़ाया और धीरे-धीरे यह कार्य समूह की आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया।
इस वर्ष अब तक बिक चुके हैं 11 हजार से अधिक दीये
समूह की सदस्य श्रीमती ममता नागराज ने बताया कि इस वर्ष दीपावली के अवसर पर समूह द्वारा तैयार किए गए 11 हजार 400 गोबर के दीये अब तक बेचे जा चुके हैं। दीपावली को देखते हुए लगातार नए ऑर्डर भी मिल रहे हैं, जिसके कारण महिलाएं उत्पादन बढ़ाने में जुटी हुई हैं। वर्तमान में समूह की महिलाएं प्रतिदिन लगभग 500 दीये तैयार कर रही हैं। इन दीयों की बिक्री सी-मार्ट, स्थानीय हाट-बाजारों और अन्य स्थानों के माध्यम से की जा रही है। समूह को रायपुर से भी ऑर्डर मिलने की जानकारी मिली है, जिससे महिलाओं का उत्साह और बढ़ गया है।
एक समूह, आजीविका के कई अवसर
सरगम उत्पादक समूह केवल गोबर के दीये ही नहीं बनाता, बल्कि महिलाओं ने स्थानीय संसाधनों और अपनी मेहनत के बल पर आय के कई साधन विकसित किए हैं। समूह द्वारा आम का अमचूर पाउडर, इमली का संग्रहण एवं प्रसंस्करण, आम का अचार, राखी निर्माण और मशरूम उत्पादन जैसे कार्य भी किए जाते हैं। तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ सी-मार्ट के माध्यम से भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
मशरूम उत्पादन से भी बढ़ी आय
समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की है। महिलाओं ने लगभग 4 हजार रुपये की लागत से मशरूम उत्पादन किया और उसे 7 हजार रुपये में बेचकर करीब 3 हजार रुपये का लाभ अर्जित किया। कम समय में हुए इस लाभ को देखते हुए अब समूह की अन्य महिलाएं भी मशरूम उत्पादन से जुड़ने की तैयारी कर रही हैं।
महिलाओं ने बताया कि बिहान के माध्यम से समूह को विभिन्न आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए बैंक से 02 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 50 हजार रुपये का अनुदान भी मिला। शेष 01 लाख 50 हजार रुपये की राशि का भुगतान समूह द्वारा किश्तों के माध्यम से बैंक को किया जा रहा है। इस आर्थिक सहयोग ने महिलाओं को अपने कार्य का विस्तार करने और नए आजीविका अवसरों से जुड़ने में मदद की है। समूह से जुड़ी सविता निषाद, टीकेश्वरी विश्वकर्मा और चिलेश्वरी विश्वकर्मा सहित अन्य महिलाएं भी विभिन्न उत्पादों के निर्माण और विपणन का कार्य कर रही हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ को साकार करती ग्रामीण महिलाएं
दीपावली के अवसर पर ग्राम भिलाई की इन महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय और प्राकृतिक गोबर के दीये ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को साकार कर रहे हैं। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से जहां ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर मिल रहा है, वहीं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के वोकल फॉर लोकल और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने के संकल्प की दिशा में सरगम उत्पादक समूह की महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर से एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। इस दीपावली में ग्राम भिलाई की इन महिलाओं के हाथों से बने एक-एक दीये में सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और स्थानीय उत्पादों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी जगमगा रहा है।